तुम यूँ मिले हो जबसे मुझे
और सुनहरी मैं लगती हूँ
सिर्फ लबों से नहीं अब तो
पूरे बदन से हंसती हूँ
मेरे दिन रात सलोने से
सब है तेरे ही होने से
ये साथ हमेशा होगा नहीं
तुम और कहीं मैं और कहीं
लेकिन जब याद करोगे तुम
मैं बनके हवा आ जाऊँगा…. ओ
मैं फिर भी तुमको चाहूँगा
इस चाहत में मर जाऊँगा
मैं फिर भी तुमको चाहूँगा
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