ओ.. ज़िन्दगी यूँ गले आ लगी है
कोई खोया हुआ बरसों के बाद आ गया
ओ फीके-फीके थे दिन-रात मेरे साथ मेरे
छुआ तूने तो जीने का स्वाद आ गया
एक तरह के आवारा थे
एक तरह की आवारगी
दीवाने तो पहले भी थे
अब और तरह की दीवानगी
सजदे बिछावां वे
गली गली, हो गली गली, हो गली गली
जिस सहर विच मेरा यार वसदा
कमाना पैंदाए खटके हो खटके
हो इत्थे रब ना कोई उधार लभदा
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