बजा क्या है देखो ज़रा तुम घड़ी
गुज़र जाये ना प्रेम की ये घड़ी
आती हूँ थोड़ा सा धीरज धरो हाँ
लगा दूंगी मैं प्रेम की फिर झड़ी
हो उतनी ही दूर है तू
जितनी करीब है
तेरे मेरे प्यार का किस्सा अजीब है
धत्त तेरे की..
अब तो जान पे बन आई
ये है प्यार की गहराई
तो किस बात की है लड़ाई
तू चल, मैं आई
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