यह शहर की गोरी
वह है गांव की छोरी
दोनों के हाटों में
मेरी पतंग की डोरी
इक तऱफ इक तरफ
इक तरफ है घरवाली
इक तरफ़ बाहरवाली
यह बोले वह आला
वह बोले मैं आली
यह शहर की गोरी
वह है गांव की छोरी
दोनों के हाटों में
मेरी पतंग की डोरी
इक तऱफ इक तरफ
इक तरफ है घरवाली
इक तरफ़ बाहरवाली
यह बोले वह आला
वह बोले मैं आली
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