जिस्म के समंदर में
एक लहर जो ठहरी है
उस में थोड़ी हरकत होने दो
हो.. शायरी सुनती इन दो नशीली आँखों को
मुझको पास आके पड़ने दो
इश्क़ की ख्वाइशों में
भिगलूँ बारिशों में, आओ ना..
जिस्म के समंदर में
एक लहर जो ठहरी है
उस में थोड़ी हरकत होने दो
हो.. शायरी सुनती इन दो नशीली आँखों को
मुझको पास आके पड़ने दो
इश्क़ की ख्वाइशों में
भिगलूँ बारिशों में, आओ ना..
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