बारिशों के मौसमों की भीगी हरियाली तू
सर्दियों में गालों पे जो आती है वो लाली तू
रातों का सुकून..
रातों का सुकून भी है
सुबह की अज़ान है
चाहतों की चादरों में
मैंने है संभाली तू
जैसी तू है वैसी रहना
जग घूमेया थारे जैसा ना कोई
जग घूमेया थारे जैसा ना कोई
बारिशों के मौसमों की भीगी हरियाली तू
सर्दियों में गालों पे जो आती है वो लाली तू
रातों का सुकून..
रातों का सुकून भी है
सुबह की अज़ान है
चाहतों की चादरों में
मैंने है संभाली तू
जैसी तू है वैसी रहना
जग घूमेया थारे जैसा ना कोई
जग घूमेया थारे जैसा ना कोई
Write a comment ...
Write a comment ...