कुछ भी नहीं है ये जहां
तू है तो है इसमें ज़िन्दगी
अब मुझको जाना है कहाँ
के तू ही सफ़र है आख़िरी
के तेरे बिना जीना मुमकिन नहीं
ना देना कभी मुझको तू फ़ासले
मैं तुझको कितना चाहती हूँ
ये तू कभी सोच ना सके
कुछ भी नहीं है ये जहां
तू है तो है इसमें ज़िन्दगी
अब मुझको जाना है कहाँ
के तू ही सफ़र है आख़िरी
के तेरे बिना जीना मुमकिन नहीं
ना देना कभी मुझको तू फ़ासले
मैं तुझको कितना चाहती हूँ
ये तू कभी सोच ना सके
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