जोगिया जोग लगाके
मखरा रोग लगा के
इश्क़ कि धुनि रोज़ जलाए
उठता धुंआ तो कैसे छुपाए
मन मस्त मगन मन मस्त मगन
बस तेरा नाम दोहराए
चाहे भी तो भूल ना पाए
मन मस्त मगन
मन मस्त मगन
बस तेरा नाम दोहराए
जोगिया जोग लगाके
मखरा रोग लगा के
इश्क़ कि धुनि रोज़ जलाए
उठता धुंआ तो कैसे छुपाए
मन मस्त मगन मन मस्त मगन
बस तेरा नाम दोहराए
चाहे भी तो भूल ना पाए
मन मस्त मगन
मन मस्त मगन
बस तेरा नाम दोहराए
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