माना की तेरी मौजूदगी से
ये जिंदगानी महरूम है
जीने का कोई दूजा तरीका
ना मेरे दिल को मालूम है
तुझको मैं कितनी शिद्दत से चाहुँ
चाहे तो रेहना तू बेखबर
मोहताज मंजिल का तो नहीं है
ये एक तरफ़ा मेरा सफ़र
सफ़र खूबसूरत है मंजिल से भी
मेरी हर कमी को है तू लाज़मी
माना की तेरी मौजूदगी से
ये जिंदगानी महरूम है
जीने का कोई दूजा तरीका
ना मेरे दिल को मालूम है
तुझको मैं कितनी शिद्दत से चाहुँ
चाहे तो रेहना तू बेखबर
मोहताज मंजिल का तो नहीं है
ये एक तरफ़ा मेरा सफ़र
सफ़र खूबसूरत है मंजिल से भी
मेरी हर कमी को है तू लाज़मी
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