आसमाँ को ज़मीं ये ज़रूरी नहीं
जा मिले, जा मिले
इश्क़ सच्चा वही जिसको मिलती नहीं
मंज़िलें, मंज़िलें
रंग थे, नूर था, जब क़रीब तू था
एक जन्नत सा था ये जहाँ
वक़्त की रेत पे कुछ मेरे नाम सा
लिख के छोड़ गया तू कहाँ? हमारी अधूरी कहानी
आसमाँ को ज़मीं ये ज़रूरी नहीं
जा मिले, जा मिले
इश्क़ सच्चा वही जिसको मिलती नहीं
मंज़िलें, मंज़िलें
रंग थे, नूर था, जब क़रीब तू था
एक जन्नत सा था ये जहाँ
वक़्त की रेत पे कुछ मेरे नाम सा
लिख के छोड़ गया तू कहाँ? हमारी अधूरी कहानी
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